अग्निपरीक्षा

गुनाह है शायद उसका खिलखिलाकर हंसना…बाते करना…जैसे सृष्टी के सारे नियम तोड डाले हो उसने…

कितनी आसानी से 

उसे बदनाम कर देते हो…मानो कयामत आ जायेगी अगर नजर उठा के जवाब दिया उसने..मंजूर नही ना आप को उसका स्वाभिमानी होना.. स्वतंत्र होना? मै बात कर रही हू…

उस शक्ती की, उस देवी की, उस साध्वी की, जो बलिदान की मूरत है…ऐसे ही साधारण स्त्री की ….

स्त्री कोई भी स्तर की हो…

नही समझ सकते हो ना तुम उसके पीडा को… नही समझ सकते हो जौहर की ज्वाला को …नही समझ सकते तुम

उसकी इच्छा को, मजबुरी की वजह को

आत्मा का समर्पण ही उसका चरित्र है…लेकीन

अपने चरित्र का प्रमाण क्यू बार बार उसे देना है?पृथ्वी के गोद मे क्यू बार बार समाधी लेना है?

मर्यादा की रेखा का क्यू स्त्री को ही सम्मान हमेशा रखना है?छू न सका रावण सीता को..क्यू की

मर्यादा पुरूषोत्तम भी हमारे राघव थे ..

फिरभी संदेह से तुम देखते रहे सीता को

दानव नही मानव हो ना तुम?

क्यू भूल जाते हो अखसर?

पिता, पती, पुत्र के रूप हो न तुम

अगर नाज है ना तुम्हे पुरूष होने पर?

तो तुम भी एक अग्निपरीक्षा देना…

कृष्ण भगवान सा अवतार लेकर … 

केशव सा रुप बनकर आत्मा को अपनी ललकार लेना..भरी सभा मे…  

द्रौपदी की पुकार सुनकर…उसका सम्मान बचाने आना तुम…

बाकी सब तो मौन रहेंगे…

जैसे उस दिन सभा में थे… 

लेकिन फिर भी न रुकना तुम..

अग्निकुंड में प्रवेश करने आना तुम ..

रक्षा कवच बनकर नारी का…. 

 एक बार जरूर आना तुम….

फिर…गर्व के साथ अपने माथे पर

“पुरूषोत्तम” ताज सजाना तुम…

 बस केवल एक अग्निपरीक्षा देना तुम…

           ©️ Shraddha (अनामिका)

                M - 8830784103

 

      




 







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